अमरोहा कोर्ट का बड़ा फैसला: झूठे आरोपों में फंसे समाजसेवी एवं शिक्षाविद डॉ अय्यूब हुसैन को किया दोषमुक्त, जांच अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई के आदेश
अमरोहा की एक अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में डॉ अय्यूब हुसैन को अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम सहित कई गंभीर आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने जांच अधिकारी की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाए और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
डॉ अय्यूब इलाके के जाने माने समाज सेवी एवं शिक्षाविद है।
मामले का विवरण:
डॉ अय्यूब पर धारा 504, 506, 420, 406 भारतीय दंड संहिता और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए थे। अदालत ने सबूतों की कमी और जांच में खामियों के चलते अय्यूब को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
कोर्ट की टिप्पणी:
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जांच अधिकारी ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई। ऐसा प्रतीत होता है कि आरोप पत्र लापरवाही से दायर किया गया था और अभियुक्त के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं थे। अदालत ने इस तरह की लापरवाही के लिए जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई या झूठे सबूत पेश करने के लिए आपराधिक मुकदमा दर्ज करने पर विचार करने का आदेश दिया है।
गवाहों पर भी कार्रवाई:
अदालत ने मामले के वादी सत्यानंद गौतम और गवाह विशौदी लाल, योगेंद्र कुमार और असलम के खिलाफ झूठे सबूत पेश करने के लिए धारा 344 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत आपराधिक मामला दर्ज करने का भी आदेश दिया है।
फैसले का महत्व:
यह फैसला न्यायपालिका में निष्पक्षता और पारदर्शिता के महत्व को दर्शाता है। यह जांच अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियों के प्रति अधिक जवाबदेह होने का भी संदेश देता है।
आगे की कार्रवाई:
जांच अधिकारी को नोटिस जारी कर उनका पक्ष सुना जाएगा, जिसके बाद उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
